जोशीमठ। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर हैस्को की ओर से डॉ. किरन नेगी के नेतृत्व में जोशीमठ विकासखंड के डुंगरा, मेराग, पर्सारी एवं सलूड गांवों में बच्चों, युवाओं और महिलाओं के साथ पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण समुदाय को पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन और सतत विकास के प्रति जागरूक करना था।
कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने आकर्षक पोस्टरों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। पोस्टरों में वृक्षारोपण, जल संरक्षण, स्वच्छ पर्यावरण और प्रकृति के महत्व को प्रभावशाली ढंग से प्रदर्शित किया गया। बच्चों ने अपने संदेशों के माध्यम से लोगों से प्रकृति के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की। युवाओं ने भी पर्यावरणीय चुनौतियों और उनके समाधान पर चर्चा करते हुए पर्यावरण संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम के दौरान डॉ. किरन नेगी ने महिलाओं के साथ विशेष संवाद सत्र आयोजित कर कार्बन फुटप्रिंट, कार्बन क्रेडिट एवं जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि हमारे दैनिक जीवन में उपयोग होने वाली ऊर्जा, परिवहन एवं उपभोग की आदतें सीधे तौर पर कार्बन उत्सर्जन को प्रभावित करती हैं। साथ ही उन्होंने पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली अपनाने, ऊर्जा की बचत करने तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के माध्यम से कार्बन उत्सर्जन को कम करने के उपायों की जानकारी दी। संवाद के दौरान महिलाओं ने भी बदलते मौसम, अनियमित वर्षा, जल स्रोतों में कमी तथा कृषि पर पड़ रहे जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से जुड़े अपने अनुभव साझा किए।
कार्यक्रम की एक विशेष आकर्षण पर्यावरण संरक्षण पर आधारित गीत रहे। लोकगीतों और जागरूकता गीतों के माध्यम से प्रकृति, जंगल, जल और पर्यावरण के महत्व को सरल एवं प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। गीतों के जरिए लोगों को पर्यावरण संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग और आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित भविष्य के निर्माण का संदेश दिया गया।
इस अवसर पर डॉ. किरन नेगी ने कहा कि हिमालयी क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन के प्रभाव तेजी से दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में समाज के प्रत्येक वर्ग, विशेषकर बच्चों, युवाओं और महिलाओं की सक्रिय भागीदारी से ही पर्यावरण संरक्षण के प्रयास सफल हो सकते हैं। उन्होंने लोगों से प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनने और पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली अपनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों ने पर्यावरण संरक्षण, जल स्रोतों की सुरक्षा, स्वच्छता और हरित भविष्य के निर्माण के लिए सामूहिक प्रयास करने का संकल्प लिया।




