नई दिल्ली, 03 मार्च 2026 विश्व वन्यजीव दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देशवासियों को शुभकामनाएँ देते हुए वन्यजीव संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि यह दिवस पृथ्वी को समृद्ध बनाने वाली अद्भुत जैव विविधता का उत्सव मनाने का अवसर है और वन्यजीवों की सुरक्षा में जुटे सभी लोगों को सम्मानित करने का दिन है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को इस बात पर गर्व है कि यहाँ विश्व के 70 प्रतिशत से अधिक बाघ पाए जाते हैं। साथ ही देश में एक सींग वाले गैंडों की सबसे बड़ी आबादी और एशियाई हाथियों की सर्वाधिक संख्या मौजूद है। उन्होंने उल्लेख किया कि भारत विश्व का एकमात्र देश है जहाँ एशियाई शेरों की संख्या निरंतर बढ़ रही है।
अंतरराष्ट्रीय पहल और संरक्षण अभियान
प्रधानमंत्री ने बताया कि सरकार ने वन्यजीव संरक्षण के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इनमें International Big Cat Alliance की स्थापना शामिल है, जो विभिन्न देशों के साथ सर्वोत्तम संरक्षण प्रथाओं को साझा करने का मंच प्रदान करती है।
इसके अतिरिक्त ग्रेट इंडियन बस्टर्ड, घड़ियाल और स्लॉथ बियर के संरक्षण के लिए विशेष पहल की गई हैं। साथ ही, देश में चीतों के स्थानांतरण कार्यक्रम को भी सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया जा रहा है।
संस्कृत सुभाषित से दिया संदेश
प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर संस्कृत का एक नीतिपरक श्लोक साझा किया—
“निर्वनो वध्यते व्याघ्रो निर्व्याघ्रं छिद्यते वनम्।
तस्माद् व्याघ्रो वनं रक्षेद् वनं व्याघ्रं च पालयेत्॥”
उन्होंने कहा कि यह श्लोक प्रकृति की परस्पर निर्भरता को दर्शाता है—जंगलों के बिना बाघ नहीं बच सकते और बाघों के बिना जंगल सुरक्षित नहीं रह सकते।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच X पर पोस्टों की श्रृंखला में कहा कि भारत की सांस्कृतिक परंपरा सभी जीवों के कल्याण की कामना करती है और हमें वन्यजीवों के प्रति संवेदनशील रहने की प्रेरणा देती है।
उन्होंने देशवासियों से अपील की कि वे संरक्षण, टिकाऊ प्रथाओं और प्राकृतिक आवासों की रक्षा के लिए संकल्पित रहें, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ भी समृद्ध जैव विविधता का अनुभव कर सकें।




