राष्ट्रीय खनिज चिंतन शिविर का आयोजन

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(नई दिल्ली)11जनवरी,2026.

राष्ट्रीय खनिज चिंतन शिविर 2026 का शुभारंभ आज गुजरात के गांधीनगर में हुआ जिसके माध्यम से भारत के खनन दृष्टिकोण ‘विकसित भारत 2047’ को नयी गति मिली, इसने खनन क्षेत्र में समन्वित सुधार एवं नवाचार के लिए एक मंच तैयार किया। राष्ट्रीय खनिज चिंतन शिविर 2026 के उद्घाटन दिवस का शुभारंभ गुजरात के मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल द्वारा औपचारिक उद्घाटन के साथ हुआ, जिसमें कोयला एवं खान मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी, जल शक्ति मंत्री श्री सी.आर. पटिल, बिहार के उपमुख्यमंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा और कोयला एवं खान राज्य मंत्री श्री सतीश चंद्र दूबे भी शामिल हुए।

गणमान्य लोगों ने संयुक्त रूप से शिविर का उद्घाटन किया, जिसमें सतत खनिज विकास, कुशल परियोजना निष्पादन और विभागीय समन्वय पर बल दिया गया, जो प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के आत्मनिर्भर एवं तकनीकी रूप से उन्नत भारत के निर्माण के दृष्टिकोण से प्रेरित है।

विभिन्न राज्यों के खान मंत्रियों ने केंद्रीय एवं राज्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मिलकर खनन क्षेत्र के कई पहलुओं पर विस्तृत जानकारी प्रदान की, जिसमें परियोजना कार्यान्वयन की चुनौतियां, विभागीय समन्वय एवं राज्य-विशेष मुद्दे शामिल हैं। उनके प्रस्तुतीकरण ने व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत किया, सर्वोत्तम प्रथाओं को उजागर किया और खनन में शासन एवं संचालन की दक्षता को सुदृढ़ करने के लिए केंद्र एवं राज्यों के बीच सहयोगात्मक चर्चाओं की आधारशिला रखी। इन सत्रों में वर्तमान में चल रही परियोजनाओं की समीक्षा की गई, तकनीकी जानकारियों को साझा किया गया और स्थायी संसाधनों का उपयोग करने के लिए नवाचारपूर्ण दृष्टिकोणों की खोज की गई।

शाम में केंद्रीय मंत्री श्री मनसुख मांडविया ने प्रतिभागियों को संबोधित किया, चिंतन शिविर के उद्देश्यों एवं महत्व पर बल दिया और खनन क्षेत्र में कार्यबल प्रबंधन एवं परिचालन-संबंधी शासन को बेहतर बनाने के लिए श्रम संहिता पर अपने विचारों को साझा किया। दिन की समाप्ति केंद्रीय एवं राज्य हितधारकों के बीच सार्थक चर्चाओं एवं बातचीत के साथ हुई, जिसने क्षेत्र में सहयोग एवं जानकारियों का आदान-प्रदान मजबूत किया।

पहले दिन ने शिविर के लिए एक मजबूत आधार तैयार किया और प्रतिभागी दूसरे दिन का उत्सुकता से इंतजार कर रहे हैं, जो राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन पर केंद्रित होगा, जो आर्थिक विकास को गति देने एवं विकसित भारत 2047 की प्राप्ति के लिए देश में महत्वपूर्ण खनिजों की पहचान, प्रचार एवं रणनीतिक उपयोग के लिए एक प्रमुख पहल है।(

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