जानिए कैसे अनूठे अंदाज में ITBP योग को दे रही बढ़ावा

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भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) देश और दुनिया में योग के प्रति लोगों को जागरूक करने की अनोखी पहल कर रही है। यह पहली बार नहीं है जब आईटीबीपी के जवानों ने इतनी ऊंचाई पर जाकर योगाभ्यास कर पूरी दुनिया को यह मैसेज दिया है अपितु हर वर्ष योग दिवस से पहले आईटीबीपी के जवान योग को बढ़ावा देने के लिए लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए कदम उठाती रही है।

22,850 फीट की ऊंचाई पर योग कर बनाया रिकॉर्ड

जानकारी के मुताबिक इस दिशा में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) ने एक बार फिर एक और दुर्लभ उपलब्धि हासिल कर ली है। दरअसल, बल के पर्वतारोहियों ने उत्तराखंड हिमालय में 22,850 फीट की ऊंचाई पर बर्फ की स्थिति में योग का अभ्यास किया है जो अपने आप में बेहद कठिन कार्य है।

आईटीबीपी के प्रवक्ता विवेक पांडेय ने बताया कि आईटीबीपी पर्वतारोही पिछले हफ्ते माउंट अबी गामिन की चोटी पर थे, जब उन्होंने रास्ते में बर्फ से ढंके एक इलाके में एक जगह पर उच्च ऊंचाई वाला योग सत्र आयोजित किया।

जमा देने वाली ठंड में 20 मिनट तक किया योगाभ्यास

पर्वत के शिखर पर पहुंचने के क्रम में, आईटीबीपी पर्वतारोहियों की 14 सदस्यीय टीम ने 1 जून, 2022 के आसपास जमा देने वाली बर्फ की स्थिति के बीच 20 मिनट तक योग का अभ्यास किया और अब तक के किसी भी व्यक्ति द्वारा सबसे अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्र में योग अभ्यास सत्र को रिकॉर्ड किया।

आईटीबीपी पर्वतारोहियों द्वारा यह एक दुर्लभ प्रयास था और इतनी ऊंचाई पर अत्यधिक हाई एल्टीट्यूड वाले योग अभ्यास को पहले कभी नहीं देखा गया था। इन ऊंचाइयों पर प्रतिकूल परिस्थितियों में यह अपनी तरह का एक अनूठा रिकॉर्ड है।

‘मानवता के लिए योग’ से प्रेरित होकर किया योगाभ्यास

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर पीएम मोदी के दृष्टिकोण और इस वर्ष की थीम- ‘मानवता के लिए योग’ से प्रेरित होकर, आईटीबीपी पर्वतारोहियों ने इतनी ऊंचाई पर योग का अभ्यास किया और लोगों को विभिन्न योगासनों का अभ्यास करके फिट रहने का संदेश दिया ।

सबसे ऊंचे इलाकों में योगासन कर योग को दिया जा रहा बढ़ावा

पिछले कुछ वर्षों में आईटीबीपी ने हिमालय के ऊंचे इलाकों में शीर्ष पर्वत श्रृंखलाओं पर योगासन करके योग को बढ़ावा देने की कई पहलें की हैं। आईटीबीपी के जवान लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश सहित भारत-चीन सीमाओं पर विभिन्न ऊंचाई वाली हिमालय पर्वतमालाओं पर सूर्य नमस्कार और विभिन्न योगासन सहित विभिन्न आसन करके योग को बढ़ावा देने में अनुकरणीय योगदान करते रहे हैं।

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