चमोली, 31 मई 2026। उत्तराखंड की सामरिक और प्राकृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण नीति घाटी में रविवार को ‘नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन’ का भव्य शुभारंभ हुआ। पर्यटन विभाग द्वारा भारतीय सेना और आईटीबीपी के सहयोग से आयोजित इस तीन दिवसीय आयोजन में देश के 28 राज्यों से आए 933 प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं।
कार्यक्रम का शुभारंभ काबीना मंत्री एवं जनपद प्रभारी मंत्री भरत सिंह चौधरी ने फ्लैग ऑफ कर किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सीमांत क्षेत्रों के समग्र विकास और पर्यटन संवर्धन के लिए निरंतर प्रयासरत है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में आयोजित यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘फिट इंडिया’ मुहिम को सीमांत क्षेत्रों तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बन रहा है।
उन्होंने कहा कि सीमांत गांवों में पर्यटन गतिविधियों के विस्तार से स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे और सीमा से सटे गांवों को मजबूती मिलेगी। साथ ही क्षेत्र की संस्कृति और प्राकृतिक सौंदर्य को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान प्राप्त होगी।
75 और 42 किलोमीटर अल्ट्रा रन में दिखा जोश
जिला पर्यटन अधिकारी अरविंद गौड़ ने बताया कि ‘नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन’ का आयोजन 31 मई से 2 जून तक किया जा रहा है। पहले दिन रिमखिम-नीति-मलारी के बीच आयोजित 75 किलोमीटर अल्ट्रा रन में 117 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जबकि मलारी-नीति-मलारी 42 किलोमीटर अल्ट्रा रन में 118 धावकों ने अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया।
उन्होंने बताया कि आगामी दिनों में 5, 10 और 21 किलोमीटर की हॉफ मैराथन प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। वहीं समापन अवसर पर गमसाली से मलारी के बीच 30 किलोमीटर एमटीबी (माउंटेन बाइक) चैलेंज का आयोजन भी किया जाएगा।
लोक संस्कृति से सजी सांस्कृतिक संध्या
आयोजन से पूर्व शनिवार रात मलारी गांव में पर्यटन विभाग की ओर से सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। प्रसिद्ध लोकगायक किशन महिपाल ने अपने लोकप्रिय लोकगीतों की शानदार प्रस्तुति देकर माहौल को उत्साह से भर दिया। प्रतिभागियों और स्थानीय लोगों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों का देर रात तक आनंद लिया।
इस अवसर पर दर्जा राज्य मंत्री हरक सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष दौलत सिंह बिष्ट, बीकेटीसी उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती, भाजपा जिलाध्यक्ष गजपाल बर्त्वाल, गृह सचिव शैलेश बगोली, सचिव पर्यटन धीराज गर्ब्याल, मुख्य विकास अधिकारी डॉ. अभिषेक त्रिपाठी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, भारतीय सेना और आईटीबीपी के अधिकारी-जवान तथा बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे।




