भारतीय अर्थव्यवस्था कई झटकों के बावजूद स्थिर : RBI गवर्नर

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रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा है कि गंभीर दूरगामी परिणाम डालने वाली दो अप्रत्याशित घटनाओं और कई झटकों के बावजूद देश की अर्थव्यवस्था दुनिया में स्थिरता का एक द्वीप बनी हुई है।

मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय समीक्षा बैठक

गवर्नर शक्तिकांत दास ने शुक्रवार को मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय समीक्षा बैठक के बाद प्रेस को संबोधित करते हुए यह बात कही। एमपीसी की समीक्षा बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था व्यापक स्तर पर उतार-चढ़ाव और अनिश्चितता के बावजूद आज दुनिया में वृहत आर्थिक तथा वित्तीय स्थिरता का ‘प्रतीक’ बनी हुई है।

महामारी सप्लाई चेन में व्यवधान एवं रूस-यूक्रेन युद्ध के बावजूद सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था

हालांकि आरबीआई गवर्नर ने यह नहीं बताया कि दो अप्रत्याशित घटनाएं क्या हैं लेकिन विगत कुछ समय में कोरोना महामारी और रूस-यूक्रेन युद्ध ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को व्यापक स्तर पर प्रभावित किया है। इन सबके बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बन गई है।

आने वाले दिनों में अब और नीचे आएगी महंगाई

आरबीआई गवर्नर ने कहा कि महंगाई दर उच्चतम स्तर को छू चुकी है, जो आने वाले दिनों में अब और नीचे आएगी। अभी यह अस्वीकार्य तौर पर बहुत ऊंचे स्तर पर है। आरबीआई गवर्नर ने यह भी कहा कि देश का चालू खाते का घाटा प्रबंधन योग्य होगा, क्योंकि केंद्रीय बैंक के पास इस अंतर को पाटने की पूरी क्षमता है।

नीतिगत दर रेपो रेट में 0.5 फीसदी का इजाफा

दरअसल, बढ़ती खुदरा महंगाई दर पर काबू पाने के लिए आरबीआई ने नीतिगत दर रेपो रेट में 0.5 फीसदी का इजाफा किया है, जो बढ़कर 5.4 फीसदी हो गया है। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि रेपो रेट में इजाफे का फैसला सर्वसम्मति से लिया गया है।

रिजर्व बैंक गवर्नर ने बताया कि वित्त वर्ष 2022-23 के लिए रियल सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) विकास अनुमान 7.2 फीसदी है। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 16.2 फीसदी, दूसरी तिमाही में 6.2 फीसदी, तीसरी तिमाही में 4.1 फीसदी और और चौथी तिमाही में 4 फीसदी व्यापक रूप से संतुलित जोखिमों के साथ होगा।

GDP वृद्धि दर 6.7 फीसदी रहने का अनुमान

वहीं उन्होंने यह भी कहा है कि वित्त वर्ष 2023-24 के पहले तिमाही में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 6.7 फीसदी रहने का अनुमान है। इसके साथ ही उन्होंने वित्त वर्ष 2022-23 में महंगाई दर 6.7 फीसदी रहने का अनुमान जताया। हालांकि, वित्त वर्ष 2023-24 के पहले तिमाही के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) पर आधारित महंगाई दर 5 फीसदी रहने का अनुमान है।

चालू वित्त वर्ष में RBI ने रेपो रेट में तीसरी बार किया इजाफा

रिजर्व बैंक गवर्नर ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था स्वाभाविक रूप से वैश्विक आर्थिक स्थिति से प्रभावित हुई है। हम उच्च महंगाई दर की समस्या से जूझ रहे हैं। हमने वर्तमान वित्तीय वर्ष के दौरान 3 अगस्त तक 13.3 अरब अमेरिकी डॉलर के बड़े पोर्टफोलियो का प्रवाह देखा है। इससे पहले आरबीआई ने रेपो रेट में 0.50 फीसदी का इजाफा कर 4.90 फीसदी कर दिया था। इस तरह रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष में रेपो रेट में तीसरी बार इजाफा किया है। आरबीआई द्वारा रेपो रेट बढ़ाने से होम और कार लोन जैसे अन्य कर्ज की ईएमआई बढ़ जाएगी।

उल्लेखनीय है कि रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष की पहली एमपीसी समीक्षा बैठक में रेपो रेट को 4 फीसदी पर स्थिर रखा था। लेकिन, आरबीआई ने 2 से 3 मई, 2022 को एमपीसी की आपात बैठक बुलाकर रेपो रेट 0.40 फीसदी बढ़ाकर 4.40 फीसदी कर दिया था। इसके बाद रिजर्व बैंक ने 6 से 8 जून, 2022 को एमपीसी की बैठक में रेपो रेट में 0.50 फीसदी का इजाफा कर 4.90 फीसदी कर दिया। आरबीआई की रेपो रेट में आज की बढ़ोतरी के बाद यह 5.40 फीसदी हो गया है। बैंक नियामक की मौद्रिक नीति समिति की समीक्षा बैठक हर दो महीने में होती है। देश में फिलहाल खुदरा महंगाई दर 7 प्रतिशत के भीतर ही है। वहीं 2021-22 में 8.7 प्रतिशत रियल जीडीपी, 2019-20 की तुलना में 1.5 प्रतिशत अधिक है।

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