सिर्फ चार साल में 50 खरब डॉलर की होगी इंडियन इकोनॉमी

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भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी. अनंत नागेश्वरन ने मंगलवार को कहा कि भारत 2026-27 तक 5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर यानि 50 खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है और अगले 10 वर्षों के अंत तक 10 ट्रिलियन डॉलर यानि 100 खरब डॉलर तक पहुंच सकता है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था वर्तमान में 3.3 ट्रिलियन डॉलर यानि 33 खरब डॉलर का मुकाम हासिल कर चुकी है, ऐसे में इसके लिए 5 ट्रिलियन डॉलर का मुकाम हासिल करना कोई मुश्किल काम नहीं होगा।

PM मोदी ने भारतीय अर्थव्यवस्था को 50 खरब डॉलर पर पहुंचाने का रखा था लक्ष्य

बता दें, पीएम मोदी ने 2019 में 2024-25 तक भारतीय अर्थव्यवस्था को 50 खरब डॉलर पर पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। विश्व बैंक ने हाल ही में चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को घटाकर 7.5 फीसदी कर दिया है। आसमान छूती महंगाई, आपूर्ति श्रृंखला संबंधी समस्याओं और भू-राजनीतिक संकट के कारण विकास दर अनुमान में बदलाव किया है।

5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य हासिल करना अब नहीं मुश्किल

यूएनडीपी इंडिया के एक कार्यक्रम में बोलते हुए, भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार नागेश्वरन ने कहा, “भारत की अर्थव्यवस्था अब 3.3 ट्रिलियन डॉलर (33 खरब डॉलर) पर हैं, इसे हासिल करना इतना मुश्किल लक्ष्य नहीं है। फिर यदि आप केवल डॉलर के संदर्भ में 10% नाममात्र जीडीपी वृद्धि मान लेते हैं, तो आप 2033-34 तक $10 ट्रिलियन और उसी दर के साथ दोगुना हो जाते हैं।”

पर्यावरण को प्राथमिकता देते हुए व्यवहार परिवर्तन जरूरी

इसके अलावा, मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा कि सकल घरेलू उत्पाद के विकास पर ध्यान केंद्रित करना पर्याप्त नहीं था। ऐसे में स्थायी आर्थिक विकास को बढ़ावा देना अधिक महत्वपूर्ण था। पर्यावरण को प्राथमिकता देते हुए व्यवहार परिवर्तन को लागू किया जाना चाहिए।

नेट जीरो के लिए दुनिया के लिए अनुकूल है भारत

उन्होंने यह भी कहा कि “विकसित देशों में नेट जीरो के लिए आवश्यक व्यावहारिक समायोजन करने को लेकर काफी विरोध हुआ था। ओईसीडी की रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि भारत एक अधिक टिकाऊ दुनिया के अनुकूल होने के अपने तरीकों से कहीं अधिक रचनात्मक और लचीला साबित हुआ।

उच्च महंगाई का जोखिम कम

मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था अन्य देशों के मुकाबले बेहतर स्थिति में है। यहां उच्च महंगाई का जोखिम भी कम है। देश का वित्तीय क्षेत्र वृद्धि को समर्थन देने के लिए अच्छी स्थिति में है। इसलिए विकास दर को लेकर ज्यादा चिंता की बात नहीं है।

सरकार ने महंगाई से निपटने के लिए आयात शुल्क में की कटौती

रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद बढ़ रही महंगाई का दबाव भी अन्य देशों के मुकाबले कम है। उन्होंने कहा कि सरकार ने भी महंगाई से निपटने के लिए आयात शुल्क में कटौती, खाद एवं रसोई गैस पर सब्सिडी और पेट्रोल-डीजल पर उत्पाद शुल्क में कटौती करने जैसे कई कदम उठाए हैं।

अर्थव्यवस्था चुनौतियों से निपटने में सक्षम

सीईए ने कहा कि भारत आज ऐसी स्थिति में है, जहां उसे वैश्विक वृहद मौद्रिक नीतियों और राजनीतिक घटनाक्रमों दोनों की वजह से चुनौतियों से जूझना पड़ रहा है। अर्थव्यवस्था ऐसी किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि इस साल भारत के समक्ष सतत उच्च वृद्धि, महंगाई को नीचे लाने और राजकोषीय घाटे को संतुलन में रखने की चुनौतियां होंगी।

मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी. अनंत नागेश्वरन के अलावा यूएन एएसजी और यूएनडीपी एशियापैक के क्षेत्रीय निदेशक कन्नी विग्नाराजा, पूर्व विदेश सचिव श्याम सरन और विकास अर्थशास्त्री शिव कुमार व डॉ. ए.के. ने भी कार्यक्रम को भी संबोधित किया।

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