देहरादून, 06 जुलाई। नेशनल सेंटर फॉर गुड गवर्नेंस (एनसीजीजी) के तत्वावधान में आयोजित क्षमता निर्माण कार्यक्रम के तहत सोमवार को श्रीलंका के 40 सदस्यीय सिविल सेवा अधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल ने उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) का भ्रमण किया। प्रतिनिधिमंडल ने राज्य की आधुनिक आपदा प्रबंधन प्रणाली, पूर्व चेतावनी तंत्र, मौसम पूर्वानुमान, भूस्खलन जोखिम न्यूनीकरण और सामुदायिक सहभागिता आधारित पहलों का विस्तृत अध्ययन किया।
यूएसडीएमए के अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (प्रशासन) प्रकाश चंद्र ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए कहा कि उत्तराखण्ड जैसे आपदा संवेदनशील राज्य में आपदा प्रबंधन केवल राहत एवं बचाव तक सीमित नहीं है, बल्कि जोखिम न्यूनीकरण, पूर्व तैयारी, संस्थागत समन्वय, क्षमता निर्माण और आधुनिक तकनीकों के प्रभावी उपयोग पर आधारित एक सतत प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार विभिन्न विभागों, वैज्ञानिक संस्थानों और स्थानीय समुदायों के सहयोग से आपदा प्रबंधन को अधिक प्रभावी और जन-केंद्रित बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है।
यूएसडीएमए के अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (क्रियान्वयन) एवं डीआईजी राजकुमार नेगी ने प्रतिनिधिमंडल को राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (एसईओसी), जिला आपातकालीन परिचालन केंद्रों (डीईओसी), घटना प्रतिक्रिया प्रणाली (आईआरएस), बहु-स्रोत पूर्व चेतावनी प्रणाली तथा सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी आधारित निर्णय सहायता प्रणालियों की कार्यप्रणाली की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उत्तराखण्ड में आपदाओं के दौरान त्वरित और समन्वित राहत एवं बचाव कार्यों के लिए एक मजबूत संस्थागत व्यवस्था विकसित की गई है।
मौसम विशेषज्ञ डॉ. पूजा राणा ने राज्य की मौसम पूर्वानुमान एवं पूर्व चेतावनी प्रणाली की जानकारी देते हुए बताया कि भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) उपग्रह आधारित अवलोकन प्रणाली, डॉप्लर वेदर रडार, स्वचालित मौसम केंद्र, स्वचालित वर्षामापी यंत्र तथा अन्य आधुनिक तकनीकों के माध्यम से रियल-टाइम मौसम संबंधी आंकड़ों का विश्लेषण कर प्रभाव आधारित पूर्वानुमान तैयार करता है।
उत्तराखण्ड भू-स्खलन न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र (यूएलएमएमसी) के निदेशक डॉ. शांतनु सरकार ने बताया कि राज्य में भूस्खलन जोखिम कम करने के लिए रिमोट सेंसिंग, जीआईएस मैपिंग, ड्रोन सर्वेक्षण, ढलानों की सतत निगरानी, वर्षा आधारित विश्लेषण और वैज्ञानिक जोखिम आकलन जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। इन अध्ययनों के आधार पर संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर ढलान स्थिरीकरण, जल निकासी सुधार और अन्य स्थायी उपचारात्मक कार्य किए जाते हैं।
श्रीलंका में भी भारी वर्षा और भूस्खलन की घटनाएं आम होने के कारण प्रतिनिधिमंडल ने उत्तराखण्ड के आपदा प्रबंधन मॉडल और वैज्ञानिक तकनीकों में विशेष रुचि दिखाई। कार्यक्रम के दौरान दोनों पक्षों के बीच आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में अनुभवों के आदान-प्रदान पर भी चर्चा हुई।
इस अवसर पर एनसीजीजी के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. ए.पी. सिंह, डॉ. एम.के. भण्डारी, यूएसडीएमए के आपदा जोखिम न्यूनीकरण विशेषज्ञ डॉ. पी.डी. माथुर तथा श्रीलंका के प्रतिनिधिमंडल के वरिष्ठ अधिकारी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।




