आज भराड़ीसैंण में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अग्निवीर सैनिकों के रूप में भर्ती होने वाले कैडेट्स के साथ संवाद किया। इस दौरान कैडेट्स ने मुख्यमंत्री से विभिन्न विषयों पर प्रश्न पूछे, जिनका मुख्यमंत्री ने सहजता से उत्तर दिया।
संवाद के दौरान शंकर सिंह राणा ने मुख्यमंत्री से पूछा कि सैनिक पुत्र होने के कारण क्या उनका मन सेना में जाने का नहीं हुआ। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सेना में जाना अन्य सेवाओं की अपेक्षा अत्यंत सम्माननीय माना जाता है। उन्होंने कहा कि वे अपने जीवन को भी एक सैनिक के जीवन की तरह अनुशासित और समर्पित मानकर कार्य करते हैं।
हिमांशु रौतेला ने पूछा कि प्रदेश के मुखिया होने के नाते वे अपने परिवार को कैसे समय दे पाते हैं। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राजनीतिक और सामाजिक जीवन में सक्रिय होने पर जिम्मेदारियां बहुत बढ़ जाती हैं और प्रदेश के सभी लोग उनका परिवार हैं।
ओ.पी. कण्डारी ने प्रश्न किया कि अग्निवीर के रूप में सेवा पूरी करने के बाद रोजगार के लिए सरकार क्या व्यवस्था कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने वर्दीधारी पदों में अग्निवीरों के लिए 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण की व्यवस्था की है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हर अग्निवीर के भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है और केंद्र सरकार भी विभिन्न क्षेत्रों में अवसर प्रदान कर रही है।
रितेश पंवार ने मुख्यमंत्री से पूछा कि उनकी पहचान ‘धाकड़ धामी’ के रूप में क्यों बनी। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनप्रतिनिधि का व्यवहार जनता के साथ सौम्य होना चाहिए, लेकिन राज्यहित में कई बार कठोर निर्णय भी लेने पड़ते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड समान नागरिक संहिता लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना है। प्रदेश में सख्त नकल विरोधी कानून और दंगा रोधी कानून भी लागू किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सैनिक सीमांत और उच्च हिमालयी क्षेत्रों में कठिन परिस्थितियों में देश की सेवा करते हैं। उत्तराखण्ड की विशेषता है कि यहां लगभग हर परिवार से कोई न कोई सदस्य सेना या अर्द्धसैन्य बलों में सेवाएं दे रहा है।
इस अवसर पर यूथ फाउंडेशन के संस्थापक कर्नल अजय कोठियाल (सेनि.), पूर्व सैनिक और अग्निवीर कैडेट्स उपस्थित रहे




