देहरादून। उत्तराखण्ड के नवनियुक्त राज्यपाल डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने सोमवार को लोक भवन में राज्यपाल पद की शपथ ग्रहण की। उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस मनोज कुमार तिवारी ने उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण समारोह के दौरान मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने राष्ट्रपति द्वारा जारी नियुक्ति अधिपत्र पढ़कर सुनाया।
शपथ ग्रहण के बाद राज्यपाल डॉ. बिसेन ने उत्तराखण्ड पुलिस द्वारा दिए गए सम्मान गार्ड का निरीक्षण किया। इसके पश्चात उन्होंने मीडिया से बातचीत में देवभूमि उत्तराखण्ड की पावन धरती और प्रदेश की जनता को नमन करते हुए राज्य की सेवा का अवसर प्रदान करने के लिए देश के शीर्ष नेतृत्व के प्रति आभार व्यक्त किया।
उत्तराखण्ड आस्था, संस्कृति और वीरता की भूमि
राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखण्ड केवल एक राज्य नहीं, बल्कि आस्था और संस्कृति का केंद्र है। बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री जैसे पवित्र चारधामों के साथ आदि कैलाश और जागेश्वर धाम इस भूमि की आध्यात्मिक पहचान हैं। प्रदेश अपने अद्वितीय पर्यटन स्थलों के लिए भी विश्वविख्यात है।
उन्होंने उत्तराखण्ड को वीरभूमि बताते हुए कहा कि यहां लगभग प्रत्येक परिवार से कोई न कोई सदस्य देश की रक्षा के लिए सेना में अपनी सेवाएं देता है। प्रदेश की मातृशक्ति सशक्त एवं प्रेरणादायी है, जबकि यहां के युवा, किसान और समाज के सभी वर्ग कर्मठ एवं परिश्रमी हैं। यही सामर्थ्य उत्तराखण्ड को विकास के विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ा रहा है।
विकास की गति को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का संकल्प
राज्यपाल डॉ. बिसेन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस विजन का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने बाबा केदार के प्रांगण से कहा था कि 21वीं सदी का तीसरा दशक उत्तराखण्ड का दशक होगा। उन्होंने कहा कि इस विजन को साकार करने के लिए प्रदेश के विकास की गति को निरंतर आगे बढ़ाते हुए नई ऊंचाइयों तक ले जाना आवश्यक है।
शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार पर रहेगा विशेष जोर
राज्यपाल ने कहा कि उनके लिए संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करना, पद की गरिमा बनाए रखना और राज्य सरकार व जनता के साथ मिलकर प्रदेश के विकास में योगदान देना प्रमुख प्राथमिकताएं होंगी। शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, पर्यटन, पर्यावरण, रोजगार और जनकल्याण से जुड़ी योजनाओं को गति देने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखण्ड की शांति, सुरक्षा और समृद्धि ही उनका परम ध्येय रहेगा। कार्यक्रम का संचालन मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने किया।




