देहरादून, 28 जुलाई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में उत्तराखण्ड स्वच्छ गतिशीलता परिवर्तन नीति-2024 के अंतर्गत आयोजित कार्यक्रम में 6 प्राथमिक लाभार्थी वाहन स्वामियों को पूंजीगत अनुदान एवं प्रोत्साहन राशि के सब्सिडी चेक वितरित किए। इस दौरान उन्होंने स्वच्छ ईंधन आधारित 11 वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। परिवहन विभाग द्वारा 5 अन्य लाभार्थियों की सब्सिडी एवं स्वीकृति प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सहायता केवल आर्थिक सहयोग नहीं, बल्कि उत्तराखण्ड को स्वच्छ, आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन व्यवस्था की ओर ले जाने के राज्य सरकार के संकल्प का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इस पहल से शहरी क्षेत्रों में स्वच्छ ईंधन आधारित सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा मिलेगा, डीजल वाहनों से होने वाले प्रदूषण में कमी आएगी और पर्यावरण संरक्षण को नई मजबूती मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन आज पूरी दुनिया के सामने गंभीर चुनौती है। ऐसे समय में विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाना सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि विकास तभी सार्थक है, जब वह प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करते हुए आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और स्वच्छ भविष्य सुनिश्चित करे।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत हरित ऊर्जा और सतत विकास के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ रहा है। वर्ष 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य, ‘लाइफस्टाइल फॉर एनवायरनमेंट’ (LiFE) अभियान, पीएम ई-बस सेवा तथा अक्षय ऊर्जा के विस्तार जैसे प्रयास इसी प्रतिबद्धता का प्रमाण हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड हिमालय की गोद में बसा राज्य है, जहां से गंगा और यमुना जैसी जीवनदायिनी नदियों का उद्गम होता है। प्रदेश की जैव विविधता, वन संपदा और प्राकृतिक धरोहरों की रक्षा करना सभी का दायित्व है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का स्पष्ट दृष्टिकोण है कि विकास और पर्यावरण एक-दूसरे के पूरक हैं।
उन्होंने बताया कि इसी सोच के अनुरूप उत्तराखण्ड स्वच्छ गतिशीलता परिवर्तन नीति-2024 लागू की गई है, जिसका उद्देश्य सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक बनाना, पुराने डीजल वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करना और सीएनजी सहित स्वच्छ ईंधन आधारित वाहनों को प्रोत्साहित करना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार देहरादून, हरिद्वार और हल्द्वानी में इलेक्ट्रिक बसों के संचालन का लगातार विस्तार कर रही है। प्रदेशभर में ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जा रहे हैं तथा शहरी क्षेत्रों में रोप-वे एवं आधुनिक अर्बन ट्रांसपोर्ट सिस्टम विकसित किए जा रहे हैं, जिससे यातायात व्यवस्था अधिक सुगम, सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल बनेगी।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखण्ड को हरित विकास का राष्ट्रीय मॉडल बनाने की दिशा में कार्य कर रही है। पीएम सूर्य घर योजना के तहत प्रदेश में रूफटॉप सोलर संयंत्रों की स्थापना तेजी से हो रही है। राज्य 40 हजार रूफटॉप सोलर संयंत्रों का प्रारंभिक लक्ष्य समय से पहले हासिल कर चुका है और कुल निर्धारित लक्ष्य का लगभग 95 प्रतिशत कार्य पूरा किया जा चुका है।
मुख्यमंत्री ने लाभार्थियों को हरित परिवहन क्रांति का अग्रदूत बताते हुए कहा कि उनके प्रयास से अन्य वाहन संचालक भी स्वच्छ ईंधन आधारित वाहनों को अपनाने के लिए प्रेरित होंगे। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के इस अभियान में जनभागीदारी को सबसे महत्वपूर्ण बताते हुए सभी नागरिकों से इसमें सक्रिय सहयोग की अपील की।
इस अवसर पर परिवहन मंत्री प्रदीप बत्रा, कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, विधायक सविता कपूर, देहरादून के मेयर सौरभ थपलियाल, सचिव परिवहन रविनाथ रमन सहित परिवहन विभाग के अधिकारी एवं अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।




