नई दिल्ली, 12 सितंबर। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारत और रूस के बीच आर्थिक एवं औद्योगिक साझेदारी को नई ऊंचाई देने का आह्वान किया है। उन्होंने दोनों देशों के उद्योग जगत से मिलकर वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर और दोतरफा निवेश को 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने के लक्ष्य पर काम करने की अपील की।
नई दिल्ली में आयोजित इनोप्रोम इंडिया 2026 के दौरान रूस के उद्योग एवं व्यापार मंत्री एंटोन अलीखानोव के साथ पूर्ण बैठक को संबोधित करते हुए गोयल ने कहा कि वर्तमान में दोनों देशों के बीच करीब 60 अरब डॉलर का व्यापार है। इसे अगले चार वर्षों में 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने के लिए व्यापार में करीब 40 अरब डॉलर की अतिरिक्त वृद्धि करनी होगी। इसके लिए लगातार दोहरे अंकों की वार्षिक वृद्धि जरूरी होगी।
फार्मा, ऑटो और खाद्य क्षेत्र में संभावनाएं
गोयल ने भारत-रूस व्यापार में विविधता लाने पर जोर देते हुए कहा कि फार्मास्यूटिकल्स, ऑटो कंपोनेंट्स, ट्रैक्टर, इंजीनियरिंग सामान और खाद्य उत्पादों के निर्यात में बड़ी संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि रूस जिन उत्पादों का दुनिया के विभिन्न देशों से बड़े पैमाने पर आयात करता है, उनमें से कई का भारत भी प्रमुख निर्यातक है, लेकिन रूस को भारतीय निर्यात अभी अपेक्षाकृत कम है।
उन्होंने बताया कि रूस को भारतीय मांस एवं मांस उत्पादों का निर्यात 36 मिलियन डॉलर से बढ़कर 97 मिलियन डॉलर, मछली एवं जलीय उत्पादों का निर्यात 123 मिलियन डॉलर से बढ़कर 159 मिलियन डॉलर और खाद्य सब्जियों का निर्यात 38 मिलियन डॉलर से बढ़कर 54 मिलियन डॉलर हो गया है। कॉफी, चाय एवं मसालों का निर्यात 13 प्रतिशत बढ़कर 116 मिलियन डॉलर पहुंच गया है।
गैर-ऊर्जा व्यापार बढ़ाने पर जोर
वाणिज्य मंत्री ने कहा कि भारत-रूस के बीच गैर-ऊर्जा व्यापार अभी अपनी वास्तविक क्षमता से काफी नीचे है। फार्मा, इंजीनियरिंग सामान, केमिकल्स, टेक्सटाइल्स, समुद्री उत्पादों और ऑटोमोबाइल क्षेत्र में भारतीय निर्यात बढ़ाकर व्यापार में अधिक संतुलन कायम किया जा सकता है।
निवेश के मोर्चे पर उन्होंने बताया कि भारत-रूस प्राथमिकता निवेश परियोजना तंत्र के तहत उन्नत विनिर्माण, ऊर्जा, खनन, रेलवे और उभरती प्रौद्योगिकियों से जुड़ी 40 सक्रिय निवेश परियोजनाओं पर काम चल रहा है। उन्होंने रूस से फार्मा, आईटी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेवाओं, इंजीनियरिंग और रेलवे जैसे क्षेत्रों में भारत में निवेश बढ़ाने का आग्रह किया।
नई निवेश संधि और एफटीए वार्ता को गति
गोयल ने कहा कि दोनों देश नई द्विपक्षीय निवेश संधि पर तेजी से काम कर रहे हैं। इसका उद्देश्य दोनों देशों के निवेशकों को कानूनी भरोसा उपलब्ध कराना है। भारत और यूरेशियन आर्थिक संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते को लेकर वार्ता भी जारी है, जिससे विशेष रूप से एमएसएमई के लिए नए बाजारों के अवसर बढ़ेंगे।
उन्होंने राष्ट्रीय एवं स्थानीय मुद्राओं में भुगतान व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत बताई। साथ ही अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे और चेन्नई-व्लादिवोस्तोक समुद्री गलियारे जैसी कनेक्टिविटी परियोजनाओं में निवेश बढ़ाने पर जोर दिया।
भारत की औद्योगिक क्षमता और रूस की तकनीक का मेल
गोयल ने कहा कि मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया और स्टार्टअप इंडिया जैसी पहलों ने भारत में मजबूत औद्योगिक इकोसिस्टम तैयार किया है। दूसरी ओर रूस के पास एयरोस्पेस, धातुकर्म, परमाणु प्रौद्योगिकी और खनन जैसे क्षेत्रों में लंबा अनुभव है। दोनों देशों की तकनीकी एवं औद्योगिक क्षमताओं का मेल आर्थिक सहयोग को नई दिशा दे सकता है।
उन्होंने कहा कि भारत-रूस संबंधों की सबसे बड़ी ताकत भरोसा है। दोनों देशों के संबंधों ने सात दशकों के वैश्विक बदलावों को देखा है और अब जरूरत है कि इस भरोसे को उत्पादन, निवेश और उद्योगों के बीच साझेदारी में बदला जाए।
गोयल ने भारत में पहली बार इनोप्रोम के आयोजन को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह आयोजन भारत-रूस संबंधों को “प्रोटोकॉल से प्रोडक्शन और इरादे से इंडस्ट्री” की दिशा में आगे बढ़ाने का संकेत है। उन्होंने दोनों देशों के अधिकारियों से भुगतान, प्रमाणन, मानकों, लॉजिस्टिक्स, वीजा और मंजूरी जैसी व्यावहारिक बाधाओं को दूर करने की दिशा में तेजी से काम करने का आह्वान किया।




