देहरादून में राष्ट्रीय पुस्तकालयाध्यक्ष दिवस का आयोजन, डॉ. रंगनाथन की विरासत को दी श्रद्धांजलि

UTTARAKHAND NEWS

देहरादून। केंद्रीय सरकारी पुस्तकालय संघ (CGLA) की ओर से राष्ट्रीय पुस्तकालयाध्यक्ष दिवस 2026 का आयोजन बोधि कॉन्फ्रेंस हॉल, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी (IGNFA), एफआरआई परिसर, देहरादून में किया गया। कार्यक्रम भारत में पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान के जनक माने जाने वाले पद्मश्री डॉ. एस. आर. रंगनाथन की 134वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया।

कार्यक्रम में पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान क्षेत्र से जुड़े 60 से अधिक पुस्तकालयाध्यक्षों, सूचना विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और गणमान्य अतिथियों ने प्रतिभाग किया। इस दौरान डॉ. रंगनाथन के योगदान को याद करते हुए वर्तमान तकनीकी एवं ज्ञान-आधारित युग में पुस्तकालयों और पुस्तकालय पेशेवरों की बदलती भूमिका पर चर्चा की गई।

कार्यक्रम का शुभारंभ IGNFA के अपर निदेशक एन. सी. सारवानन, CGLA अध्यक्ष डॉ. ए. के. सुमन और महासचिव मनीष शर्मा सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों द्वारा दीप प्रज्वलन से हुआ। इसके बाद डॉ. एस. आर. रंगनाथन को पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई। ग्लेशियर पब्लिक स्कूल के छात्र अभिनव थापा ने सिंथेसाइज़र पर संगीतमय प्रस्तुति दी।

कार्यक्रम में डॉ. रंगनाथन के जीवन और योगदान पर आधारित विशेष वृत्तचित्र भी प्रदर्शित किया गया। इसका संकल्पना एवं निर्माण मनीष शर्मा द्वारा किया गया था। वृत्तचित्र को प्रतिभागियों ने सराहा और इसे डॉ. रंगनाथन के प्रति प्रभावशाली दृश्य श्रद्धांजलि बताया।

पुस्तकों के नियमित पठन पर दिया जोर

मुख्य अतिथि एन. सी. सारवानन ने अपने संबोधन में अपने शैक्षणिक एवं व्यावसायिक जीवन के अनुभव साझा किए। उन्होंने अपने जीवन में पुस्तकों और नियमित पठन की महत्वपूर्ण भूमिका का उल्लेख करते हुए उपस्थित लोगों को पढ़ने की आदत विकसित करने के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने डॉ. रंगनाथन के पुस्तकालय विज्ञान के पांच नियमों का उल्लेख करते हुए विशेष रूप से “Books are for Use” के सिद्धांत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पुस्तकालयों का उद्देश्य केवल पुस्तकों और ज्ञान-संसाधनों का संरक्षण नहीं, बल्कि उन्हें अधिकतम लोगों तक पहुंचाना और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना है।

AI और तकनीक के साथ बदल रही पुस्तकालयों की भूमिका

CGLA अध्यक्ष डॉ. ए. के. सुमन ने संघ की गतिविधियों और उपलब्धियों की जानकारी देते हुए पुस्तकालय पेशेवरों के बीच व्यावसायिक संवाद, ज्ञान-विनिमय और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया।

CGLA के उपाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) शिव नंदन पांडे ने तकनीकी युग में पुस्तकालयों की बदलती भूमिका पर विचार रखे। उन्होंने डिजिटल संसाधनों, उभरती तकनीकों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को अपनाने के साथ पुस्तकालय व्यवसाय के मूल मूल्यों को बनाए रखने की आवश्यकता बताई।

वहीं डॉ. रामवीर तंवर ने पुस्तकालय सेवाओं में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डाला। डॉ. शिव प्रसाद सेनापति, PLIO, LBSNAA मसूरी ने ऑनलाइन माध्यम से सहभागिता करते हुए ज्ञान-आधारित समाज के निर्माण में पुस्तकालयों एवं सूचना पेशेवरों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

धनेश पांडे को Outstanding Lifetime Achievement Award

कार्यक्रम में भारतीय वन सर्वेक्षण के पूर्व पुस्तकालयाध्यक्ष धनेश पांडे को पुस्तकालय व्यवसाय में उनके दीर्घकालीन एवं समर्पित योगदान के लिए Outstanding Lifetime Achievement Award प्रदान किया गया।

श्री पांडे ने अपने व्यावसायिक जीवन के अनुभव साझा करते हुए कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद भी पुस्तकालय व्यवसाय से जुड़े रहकर अपने अनुभव एवं ज्ञान के माध्यम से नई पीढ़ी का मार्गदर्शन किया जाना चाहिए।

कार्यक्रम में पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान क्षेत्र से जुड़े अनेक वरिष्ठ पेशेवरों एवं प्रतिभागियों को भी सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन सुश्री सुरभि जॉली ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन CGLA महासचिव मनीष शर्मा ने प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम के समापन पर हाई टी का आयोजन किया गया। इस दौरान पुस्तकालय समुदाय के सदस्यों ने आपस में विचार-विनिमय किया। आयोजन में पुस्तकालयों को अधिक सुलभ, तकनीक-सक्षम, उपयोगकर्ता-केंद्रित और आजीवन सीखने के जीवंत केंद्र के रूप में विकसित करने के सामूहिक संकल्प को दोहराया गया।

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