हिमालयी संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण की चेतना को नई दिशा देगी ‘हिमालयन संस्कृति’ : मुख्यमंत्री

UTTARAKHAND NEWS

देहरादून, 14 सितंबर। हिन्दी दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में हिमालयी संस्कृति, परंपराओं और लोक जीवन को समर्पित पत्रिका ‘हिमालयन संस्कृति’ के प्रवेशांक का विमोचन किया।

मुख्यमंत्री ने पत्रिका के प्रकाशन की सराहना करते हुए कहा कि हिमालय केवल भौगोलिक क्षेत्र नहीं, बल्कि भारत की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक चेतना का महत्वपूर्ण आधार है। हिमालयी राज्यों की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं, लोक आस्थाओं, रीति-रिवाजों, लोक कला, लोक साहित्य, इतिहास और विरासत को संरक्षित करना सामूहिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि ‘हिमालयन संस्कृति’ के माध्यम से हिमालय की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान और लोक परंपराओं को जन-जन तक पहुंचाने तथा युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से परिचित कराने का महत्वपूर्ण प्रयास किया गया है। पत्रिका हिमालयी समाज की जीवंत सांस्कृतिक विरासत के संदर्भ-स्रोत के रूप में उपयोगी सिद्ध होगी। साथ ही, यह हिमालयी पर्यावरण के संरक्षण एवं संवर्धन के प्रति जागरूकता और संवेदनशीलता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

पत्रिका के संपादक रजनीश कौंसवाल ने बताया कि प्रवेशांक में हिमालयी संस्कृति के विभिन्न पक्षों को एक मंच पर प्रस्तुत किया गया है। इसमें लोक स्मृतियों, परंपरागत ज्ञान, लोक कलाओं, सामाजिक सरोकारों और पर्यावरणीय चेतना को दस्तावेज के रूप में संरक्षित करने का प्रयास किया गया है।

इस अवसर पर रायपुर विधायक उमेश शर्मा (काऊ), भाजपा महानगर अध्यक्ष सिद्धार्थ अग्रवाल, विनोद खंडूरी, बद्री-केदार मंदिर समिति के उपाध्यक्ष प्रसाद सती, सदस्य राजपाल जड़धारी, विपिन, वरिष्ठ पत्रकार हरीश कोठारी सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति एवं संस्कृति प्रेमी उपस्थित रहे। सभी ने संपादक रजनीश कौंसवाल को इस अभिनव पहल के लिए शुभकामनाएं दीं।

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