पीएम मोदी ने सिविल सेवकों को किया संबोधित

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को सिविल सेवा दिवस पर लोक प्रशासन में उत्कृष्टता के लिए 16 अधिकारियों को प्रधानमंत्री पुरस्कार से सम्मानित किया। इस दौरान उन्होंने सिविल सेवकों को संबोधित करते हुए तीन लक्ष्य भी दिए। साथ ही पीएम ने राष्ट्र प्रथम के मंत्र को दोहराते हुए कहा कि हम देश की अखंडता और एकता से कोई समझौता नहीं कर सकते। इस दौरान उन्होंने कहा कि वह पिछले 20-22 वर्षों से सिविल सेवकों के साथ बातचीत कर रहे हैं, पहले मुख्यमंत्री के रूप में और बाद में प्रधानमंत्री के रूप में। उन्होंने कहा कि यह परस्पर सीखने का अनुभव रहा है।

राष्ट्र का सद्भाव और अखंडता बनाए रखें

पीएम मोदी ने विज्ञान भवन में लोक प्रशासन में उत्कृष्टता के लिए 16 अधिकारियों को प्रधानमंत्री पुरस्कार प्रदान करने के बाद संबोधित किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विभिन्न विचारधाराएं हो सकती हैं लेकिन हमें हमेशा देश की एकता और अखंडता को मजबूत करना चाहिए। देश की एकता को ध्यान में रखते हुए हर फैसला लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्र प्रथम के मंत्र के साथ राष्ट्र का एकता और अखंडता बनाए रखें। हमारे सभी प्रयास राष्ट्र प्रथम, भारत प्रथम से जुड़े होने चाहिए।

सिविल सेवकों को दिए तीन लक्ष्य

सिविल सेवकों को लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं के लिए तीन लक्ष्य देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि हम एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में है और हमारे सामने तीन लक्ष्य साफ-साफ होने चाहिए। पहला लक्ष्य है कि देश में सामान्य से सामान्य मानवी के जीवन में बदलाव आए, उसके जीवन में सुगमता आए और उसे इसका एहसास भी हो। उन्होंने कहा कि दूसरे लक्ष्य है कि आज हम कुछ भी करें, उसको वैश्विक सन्दर्भ में करना समय की मांग है। तीसरे लक्ष्य को लेकर कहा कि व्यवस्था में हम कहीं पर भी हों, लेकिन जिस व्यवस्था से हम निकले हैं, उसमें हमारी मुख्य जिम्मेदारी देश की एकता और अखंडता है। इसके अलावा पीएम ने जोर देकर कहा कि प्रधान मंत्री ने जोर दिया कि हमारे सिस्टम और मॉडल नियमित गति से अपडेट होते रहना चाहिए, हम पिछली शताब्दी की प्रणालियों के साथ आज की चुनौतियों का सामना नहीं कर सकते

पीएम ने कहा कि भारत की महान संस्कृति की ये विशेषता है कि हमारा देश शाही व्यवस्थाओं और शाही सिंहासनों से नहीं बना है। उन्होंने कहा कि जन सामान्य के सामर्थ्य को लेकर चलने की हमारी हजारों साल की परंपरा रही है। आजादी के अमृत महोत्सव में जब देश आजादी के 75 साल मना रहा है ऐसे में यह आयोजन विशेष है।

वर्चुअल माध्यम से अपने अनुभव करें साझा

पीएम ने पुरस्कार विजेताओं से कहा कि वे विदेश मंत्रालय और पुलिस विभाग सहित देशभर में स्थित सिविल सेवा से जुड़े तमाम प्रशिक्षण संस्थानों में ट्रेनिंग ले रहे प्रशिक्षुओं को हर सप्ताह एक से डेढ़ घंटे का समय निकालकर वर्चुअल माध्यम से अपने अनुभव साझा करें। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक सप्ताह ऐसे दो पुरस्कृत अधिकारियों से चर्चा होगी, तो आने वाली नई पीढ़ी के अधिकारियों को उनके अनुभवों से काफी मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि ऐसा करना अधिकारियों को लिए भी लाभप्रद होगा और वे इससे जुड़े रहेंगे।

पूर्व अधिकारियों से लें अनुभव

पीएम मोदी ने अधिकारियों से कहा कि मैं चाहूंगा कि आजादी के इस अमृत काल में आप अपने डिस्ट्रिक्ट में जो पहले कलेक्टर के रूप में काम करके गए हैं, एक बार अगर हो सके तो उनका मिलने का कार्यक्रम बनाइये। आपके पूरे जिले के लिए वो एक नया अनुभव होगा। इसी तरह, राज्यों के मुख्यमंत्री इस ऐतिहासिक वर्ष में राज्य के पूर्व मुख्य सचिवों, कैबिनेट सचिवों को बुला सकते हैं और स्वतंत्र भारत की यात्रा में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले प्रशासनिक तंत्र के ध्वजवाहकों से लाभ उठा सकते हैं। आजादी का अमृत महोत्सव के वर्ष में सिविल सेवा को सम्मानित करने का यह एक उपयुक्त तरीका होगा।

 8 साल के दौरान देश में अनेक बड़े काम हुए

हम पिछली शताब्दी की सोच और नीति नियमों से अगली शताब्दी की मजबूती का संकल्प नहीं कर सकते। इसलिए हमारी व्यवस्थाओं, नियमों में परंपराओं में पहले शायद बदलाव लाने में 30 -40 साल चले जाते होंगे, तो चलता होगा। लेकिन तेज गति से बदलते हुए विश्व में हमें पल पल के हिसाब से चलना पड़ेगा। उन्होंने आगे कहा कि पिछले 8 साल के दौरान देश में अनेक बड़े काम हुए हैं। इनमें से अनेक अभियान ऐसे हैं, जिनके मूल में व्यवहार परिवर्तन है।

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