देहरादून। मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सभी विभागीय सचिवों को निर्देश दिए हैं कि बाह्य सहायतित योजनाओं के तहत आगामी वर्षों के लिए नई योजनाओं की कार्ययोजना तैयार कर शीघ्र उपलब्ध कराई जाए।
सोमवार को सचिवालय में आयोजित सचिव समिति की बैठक में मुख्य सचिव ने वित्तीय प्रबंधन को सुदृढ़ बनाने के लिए निर्धारित मानकों एवं नियमों के अनुसार कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी विभागों से अपनी संपत्तियों की विस्तृत इन्वेंट्री तैयार करने, आधुनिक तकनीक के माध्यम से उनका संरक्षण करने तथा सम्पत्तियों का पूरा विवरण उपलब्ध कराने को कहा।
मुख्य सचिव ने विभागीय कार्यप्रणाली में सुधार पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि विभागीय सेवाओं को और बेहतर बनाया जाए तथा आगामी तीन वर्षों के लिए बाह्य सहायतित योजनाओं के अंतर्गत जनहित में आवश्यक परियोजनाओं के प्रस्ताव प्रस्तुत किए जाएं। अवस्थापना विकास से जुड़ी परियोजनाओं के लिए व्यापक (कम्प्रिहेंसिव) अध्ययन किए जाने की भी आवश्यकता जताई गई।
राज्य से संबंधित पुरातन अभिलेखों के डिजिटलीकरण पर बल देते हुए मुख्य सचिव ने सभी प्रमुख रिकॉर्ड रखने वाले विभागों और संस्थानों से अभिलेखों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इन अभिलेखों को अभिलेखागार (आर्काइव) में सुरक्षित रखने की व्यवस्था पर भी जोर दिया गया।
बैठक में “एग्री स्टेक इन उत्तराखण्ड” के तहत डिजिटल क्रॉप सर्वे और फार्मर रजिस्ट्री के कार्यों में तेजी लाने के निर्देश भी दिए गए।
मुख्य सचिव ने विभागीय प्राथमिकताओं की समीक्षा की तथा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिलाधिकारियों से योजनाओं के क्रियान्वयन में आ रही समस्याओं की जानकारी ली। जिला स्तर पर अपनाई जा रही ‘बेस्ट प्रैक्टिसेस’ के अंतर्गत जिलाधिकारी अल्मोड़ा एवं पौड़ी द्वारा स्वास्थ्य सुविधाओं के विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी साझा की गई।
मुख्य सचिव ने आगामी बैठक में जिलाधिकारी टिहरी एवं उधमसिंह नगर को अपने जनपदों में अपनाई जा रही बेस्ट प्रैक्टिसेस का प्रस्तुतीकरण देने के निर्देश दिए।
बैठक में सभी प्रमुख सचिव, सचिव, आयुक्त एवं जिलाधिकारी वीडियो माध्यम से उपस्थित रहे।




